झारखण्ड में 30 नाबालिगों को तस्करो से बचाया गया
झारखण्ड में 30 नाबालिगों को तस्करो से बचाया गया

समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा कि मानव तस्करी और प्रवासी कामगारों के शोषण को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण पिछले सप्ताह 30 नाबालिग लड़कियों और लड़कों को बचाया गया ।

सोरेन ने एक बयान में बताया कि 24 जून को राज्य पुलिस विभाग की कार्रवाई के चलते रांची रेलवे स्टेशन और बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से 30 बच्चों को बचाया गया। पीटीआई की खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘उनकी तस्करी दिल्ली की जा रही थी।

सोरेन ने आगे कहा कि उनकी सरकार तस्करी से बचे लोगों को 18 साल की उम्र हासिल करने तक जीवन यापन करने के लिए 2000 रुपयेप्रति माह प्रदान कर रही है । उन्होंने कहा कि वित्तीय सहायता के अलावा लड़कियों को मुफ्त शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलेगा जिससे वे स्वतंत्र हो सकेंगी ।

सोरेन ने कहा कि खासकर राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में मानव तस्करी विरोधी इकाई के गठन का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मानव तस्करी पर नियंत्रण रखने के लिए राज्य भर में महिला पुलिस अधिकारियों की भी नियुक्ति की जाएगी । मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही उन बच्चों के पुनर्वास के लिए विस्तृत योजना लेकर आएगी जिनके माता-पिता कोविड-19 के शिकार हुए और मारे गए ।

पिछले साल चल रहे कोरोनावायरस महामारी के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान गंभीर रूप से पीड़ित प्रवासी कामगारों के मुद्दे को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार कामगारों के कल्याण को लेकर चिंतित है ।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बताया कि महामारी से प्रेरित पलायन संकट के बावजूद राज्य ने इस मामले को संवेदनशीलता से संभाला है । उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से झारखंड स्थित प्रवासी कामगारों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की । उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों सहित तीस प्रवासी मजदूरों को वापस झारखंड लाया गया ।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में झारखंड में स्वदेश लौटे 250,056 प्रवासी मजदूरों की स्किल मैपिंग से पता चला था कि 177,186 या 70 फीसदी स्वदेश लौटने वाले कुशल मजदूर हैं, जबकि बाकी 72,871 अकुशल कामगार हैं। सरकार के निर्देश पर मैपिंग की गई थी कि उन्हें उनके कौशल के अनुसार नौकरी उपलब्ध कराई जाए।

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