UP में फिर से मुस्लिम तुस्टीकरण कि राजनीती शुरू, सपा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को मुस्लिमों के खिलाफ साज़िस बताया, कहा जनसंख्या वृद्धि के लिए मुस्लिम नहीं दलित और आदिवासी जिम्मेदार हैं
UP में फिर से मुस्लिम तुस्टीकरण कि राजनीती शुरू, सपा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को मुस्लिमों के खिलाफ साज़िस बताया, कहा जनसंख्या वृद्धि के लिए मुस्लिम नहीं दलित और आदिवासी जिम्मेदार हैं

27 जून को समाजवादी पार्टी के विधायक इकबाल महमूद ने उत्तर प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि के लिए दलित और आदिवासियों को दोषी ठहराया । उनका यह बयान सीएम योगी के नेतृत्व वाले उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बहाने आया है, जिसमें प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की संभाव्यता की जांच के निर्देश दिए गए हैं ।

खबरों के अनुसार प्रदेश का विधि आयोग जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की संभावना की जांच कर रहा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ के आसपास है। जनसंख्या के मुताबिक यह देश का सबसे बड़ा राज्य है। अगर दुनिया की आबादी की तुलना करें तो आबादी के मामले में उत्तर प्रदेश सिर्फ तीन राष्ट्रों से पीछे है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, यूपी सरकार राज्य में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना चाहती है।

आबादी के खिलाफ कानून मुसलमानों के खिलाफ साजिश है- इकबाल महमूद

रविवार को सपा नेता इकबाल महमूद ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जिस जनसंख्या नियंत्रण कानून को बनाने की योजना बना रही है, वह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ साजिश है। उन्होंने कहा, जनसंख्या नियंत्रण के खिलाफ कोई भी कानून मुसलमानों के खिलाफ साजिश होगी। उन्होंने आगे कहा, देश की आबादी में वृद्धि दलितों और आदिवासियों की वजह से है न कि मुसलमानों की वजह से। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण के बहाने मुसलमानों पर हमला करने की कोशिश कर रही है।

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यह सवाल उठाते हुए कि ऐसा कानून सिर्फ एक राज्य में क्यों लाया जा रहा है, उन्होंने कहा, अगर भाजपा को लगता है कि देश में सिर्फ मुस्लिम आबादी बढ़ रही है तो इस कानून के लिए एक बिल संसद में लाया जाना चाहिए था ताकि इसे पूरे देश में लागू किया जा सके। इसे यूपी में क्यों लाया जा रहा है? उन्होंने दावा किया कि मुसलमान पहले ही समझ चुके हैं कि 2-3 से ज्यादा बच्चों के लिए नहीं जाना है।

उन्होंने चेतावनी दी कि जनसंख्या नियंत्रण कानून भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के समान होगा । उन्होंने कहा, असम में NRC का असर मुस्लिमों की तुलना में गैर मुस्लिमों पर ज्यादा पड़ा। जनसंख्या कानून का भी यही हश्र होगा। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि जिस योगी आदित्यनाथ सरकार के पास बमुश्किल सात महीने बचे हैं, वह जनसंख्या नियंत्रण कानून की बात क्यों कर रही है?

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‘आप निजाम-ए-कुदरत को नियंत्रित नहीं कर सकते’- शफीकुर रहमान बारक़

समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर रहमान बारिक ने भी आबादी को नियंत्रित करने के लिए प्रस्तावित कानून को मुस्लिमों के खिलाफ साजिश कहा। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, बीजेपी ऐसे कानून शुरू करके वोट हासिल करने की कोशिश कर रही है जिससे मुसलमानों को नुकसान हो। उन्होंने आरोप लगाया, “लेकिन इससे बीजेपी को फायदा होने के बजाय नुकसान होगा । बच्चों के जन्म को ‘ निजाम-ए-कुद्रत ‘ बताते हुए बार्क ने कहा कि इसे कोई रोक नहीं सकता । उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जनसंख्या को नियंत्रित करने का कोई भी प्रस्ताव गैरकानूनी है और इससे राज्य में समस्याएं पैदा होंगी।

यूपी सरकार दो महीने में ड्राफ्ट की जांच करेगी

खबरों के अनुसार प्रदेश का विधि आयोग एक मसौदे पर काम कर रहा है, जो दो महीने में तैयार हो जाएगा। विधि आयोग के अध्यक्ष आदित्य नाथ मित्तल ने कहा कि दो महीने के भीतर मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।

‘दो बच्चे ही अच्छे’

यूपी सरकार ने 27 जून को राज्य में ‘दो बच्चे ही अच्छे’ (यह बेहतर है जब आपके केवल दो बच्चे हैं) आंदोलन नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है । यह कार्यक्रम 11 जुलाई यानी विश्व जनसंख्या दिवस तक चलेगा। कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ता दो या दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों को चिह्नित करेंगी। इन परिवारों को कम बच्चे होने के फायदों के बारे में जानकारी देने के लिए काउंसलिंग की जाएगी। नवविवाहित जोड़ों को छोटे परिवारों के लाभ के बारे में बताया जाएगा। लोगों को परिवार नियोजन के बारे में सिखाने के लिए सरकार प्रदेश भर में मोबाइल वैन भी चलाएगी।

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